देशभक्ति शायरी | Hu Beta Hindustan ka01:31

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Published on January 15, 2018

देशभक्ति शायरी | Hu Beta Hindustan ka

जब सूरज संग हो जाए अंधियार के, तब दीये का टिमटिमाना जरूरी है

जब प्यार की बोली लगने लगे बाजार में, तब प्रेमी का प्रेम को बचाना जरूरी है
जब देश को खतरा हो गद्दारों से, तो गद्दारों को धरती से मिटाना जरूरी है
जब गुमराह हो रहा हो युवा देश का, तो उसे सही राह दिखाना जरूरी है
जब हर ओर फैल गई हो निराशा देश में, तो क्रांति का बिगुल बजाना जरूरी है
जब नारी खुद को असहाय पाए, तो उसे लक्ष्मीबाई बनाना जरूरी है
जब नेताओं के हाथ में सुरक्षित न रहे देश, तो फिर सुभाष का आना जरूरी है
जब सीधे तरीकों से देश न बदले, तब विद्रोह जरूरी है

अपने धर्म, देश, भाषा की, जो इज़्ज़त करते हैं,
धर्म, देश और भाषा प्रेमी, सब उनको कहते हैं।

हिंदू, हिंदी, हिंदोस्तान, ये पहचान हैं मेरी,
तीनों ही मुझमें रहते हैं, तीनों जान हैं मेरी,
जहाँ भी रहता हूँ ये मेरे, साथ-साथ रहते हैं।

अपनी सभ्यता, संस्कृति से, मैंने वो पाया है,
इस धरती से, उस अंबर तक, जो सबसे प्यारा है,
जिसको पाने की कोशिश में, सारे ही मरते हैं।

भारत कह लो, इंडिया कह लो, या फिर हिंदोस्तान,
मेरी आँखें उसी तरफ़ हैं, उसी तरफ़ है ध्यान,
तन से रूह, उसके गुण गाते, उसमें ही बसते हैं।

ओ विप्लव के थके साथियों
विजय मिली विश्राम न समझो
उदित प्रभात हुआ फिर भी छाई चारों ओर उदासी
ऊपर मेघ भरे बैठे हैं किंतु धरा प्यासी की प्यासी
जब तक सुख के स्वप्न अधूरे
पूरा अपना काम न समझो
विजय मिली विश्राम न समझो

देशभक्ति शायरी | Hu Beta Hindustan ka

पद-लोलुपता और त्याग का एकाकार नहीं होने का
दो नावों पर पग धरने से सागर पार नहीं होने का
युगारंभ के प्रथम चरण की
गतिविधि को परिणाम न समझो
विजय मिली विश्राम न समझो

तुमने वज्र प्रहार किया था पराधीनता की छाती पर
देखो आँच न आने पाए जन जन की सौंपी थाती पर
समर शेष है सजग देश है
सचमुच युद्ध विराम न समझो
विजय मिली विश्राम न समझो

नदी, झील, झरनों की झाँकी मनमोहक है,
सुमनों से सजी घाटी-घाटी मेरे देश की।
सुरसरिता-सी सौम्य संस्कृति की सुवास,
विश्व भर में गई है बाँटी मेरे देश की।
पूरी धऱती को एक परिवार मानने की,
पावन प्रणम्य परिपाटी मेरे देश की।
शत-शत बार बंदनीय अभिनंदनीय,

 देशभक्ति शायरी | Hu Beta Hindustan ka

दिल से मर कर भी ना निकलेगी वतन की उल्फ़त,
मेरे मिट्टी से भी खुशबू-ए-वतन आएगी.

जो अब तक ना खौला वो खून नही पानी हैं,
जो देश के काम ना आये वो बेकार जवानी हैं.

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं,
देखना हैं जोर कितन बाजू-ए-कातिल में हैं,
वक्त आने दे बता देंगे तुझे ए आसमां,
हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में हैं.

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