देशभक्ति शायरी | Mera Mulk Mera Desh04:15

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Published on January 15, 2018

देशभक्ति शायरी | Mera Mulk Mera Desh

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पे मर मिटनेवालों का बाकी यही निशां होगा

अनेकता में एकता ही इस देश की शान है,
इसीलिए मेरा भारत महान है

मैं भारतवर्ष का हरदम अमिट सम्मान करता हूँ
यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ,
मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की,
तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ।

सारे जहाँ से अच्छा
हिंदुस्तान हमारा
हम बुलबुलें हैं उसकी
वो गुलसिताँ हमारा।
परबत वो सबसे ऊँचा
हमसाया आसमाँ का
वो संतरी हमारा
वो पासबाँ हमारा।

गोदी में खेलती हैं
जिसकी हज़ारों नदियाँ
गुलशन है जिनके दम से
रश्क-ए-जिनाँ हमारा।

मज़हब नहीं सिखाता
आपस में बैर रखना
हिंदी हैं हम वतन है
हिंदुस्तान हमारा।

देशभक्ति शायरी | Mera Mulk Mera Desh

जब सूरज संग हो जाए अंधियार के, तब दीये का टिमटिमाना जरूरी है…
जब प्यार की बोली लगने लगे बाजार में, तब प्रेमी का प्रेम को बचाना जरूरी है……
जब देश को खतरा हो गद्दारों से, तो गद्दारों को धरती से मिटाना जरूरी है….
जब गुमराह हो रहा हो युवा देश का, तो उसे सही राह दिखाना जरूरी है………..
जब हर ओर फैल गई हो निराशा देश में, तो क्रांति का बिगुल बजाना जरूरी है…..
जब नारी खुद को असहाय पाए, तो उसे लक्ष्मीबाई बनाना जरूरी है…………
जब नेताओं के हाथ में सुरक्षित न रहे देश, तो फिर सुभाष का आना जरूरी है……
जब सीधे तरीकों से देश न बदले, तब विद्रोह जरूरी है……………..

तबसे अब में खूब,मचा विकास का जनादेश !
एसी तैसी हुआ ,बहुत बदल गया अपना देश !!
बहुत बदल गया अपना देश !
अंग्रेजी का भाव बढ़ गया ,देश हुआ परदेश !
पगड़ी गमछा लाज लगे,भाए बिलायती भेष!!
बहुत बदल गया अपना देश !
दाल भात पचता नहीं,रोग बर्गर पिज्जा की तैस !
शौखिनी में बड़ी गरीबी,भुगते लाग बाज की रेस !!
बहुत बदल गया अपना देश !
माँ बहन अफसोस हो गयी,बिटिया हुई कलेस!
कलंकओढ़ बहू जल गयी,कलमुही है सन्देश!!
बहुत बदल गया अपना देश !
गवांर मरे मजदूरी बिन  ,पढे़-लिखे सब शेष !
करता धरता आलस बांचे,बचा न कुछ उद्देश !!
बहुत बदल गया अपना देश !
साधू सन्त व्यापार करे ,चोर उचक्का आदेश !
हुआ निकम्मा अभिेनेता ,जग बांटे सब उपदेश!!
बहुत बदल गया अपना देश !
शाकाहारी खेत खरीहान ,उजाड़ बसे सब ऐस!
मांसाहारी भूख जीभ का, शमशान बना ए द्वेष!!
बहुत बदल गया अपना देश !
चारा सारा राजनीति खा गया,गाये खाए आवेश !
किसान मरे बिन पानी के,न लगा किसीको ठेस !!
बहुत बदल गया अपना देश !
पत्थर खुद पर दे मारे ,कुछ उन्मादी तर्क अन्वेष !
आम बात हुई सहादत ,क्या सरकारी अध्यादेश!!
बहुत बदल गया अपना देश !
बहुत बदल गया अपना देश !

 

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