देश भक्ति कविता | Desh Bulata Hai02:32

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Published on January 15, 2018

देश भक्ति कविता | Desh Bulata Hai

हम ऐसे आज़ाद हमारा झंडा है बादल।
चाँदी सोने हीरे मोती से सजती गुड़ियाँ।
इनसे आतंकित करने की बीत गई घड़ियाँ
इनसे सज धज बैठा करते जो हैं कठपुतले
हमने तोड़ अभी फेंकी हैं बेड़ी हथकड़ियाँ

परंपरा गत पुरखों की हमने जाग्रत की फिर से
उठा शीश पर रक्खा हमने हिम किरीट उज्जवल
हम ऐसे आज़ाद हमारा झंडा है बादल।

चाँदी सोने हीरे मोती से सजवा छाते
जो अपने सिर धरवाते थे वे अब शरमाते
फूलकली बरसाने वाली टूट गई दुनिया
वज्रों के वाहन अंबर में निर्भय घहराते

इंद्रायुध भी एक बार जो हिम्मत से ओटे
छत्र हमारा निर्मित करते साठ कोटि करतल
हम ऐसे आज़ाद हमारा झंडा है बादल।

देश भक्ति कविता | Desh Bulata Hai

जय जय प्यारा, जग से न्यारा,
शोभित सारा, देश हमारा,
जगत-मुकुट, जगदीश दुलारा
जग-सौभाग्य सुदेश!
जय जय प्यारा भारत देश।

प्यारा देश, जय देशेश,
जय अशेष, सदस्य विशेष,
जहाँ न संभव अध का लेश,
केवल पुण्य प्रवेश।
जय जय प्यारा भारत देश।

स्वर्गिक शीश-फूल पृथ्वी का,
प्रेम मूल, प्रिय लोकत्रयी का,
सुललित प्रकृति नटी का टीका
ज्यों निशि का राकेश।
जय जय प्यारा भारत देश।

जय जय शुभ्र हिमाचल शृंगा
कलरव-निरत कलोलिनी गंगा
भानु प्रताप-चमत्कृत अंगा,
तेज पुंज तपवेश।
जय जय प्यारा भारत देश।

देश भक्ति कविता | Desh Bulata Hai

जगमें कोटि-कोटि जुग जीवें,
जीवन-सुलभ अमी-रस पीवे,
सुखद वितान सुकृत का सीवे,
रहे स्वतंत्र हमेश
जय जय प्यारा भारत देश।

 

प्रात: स्मरणीय शहीदों का वंदन है
जिनके त्याग तपोवन से माटी चंदन है

जिन्हें आत्म सम्मान रहा प्राणों से प्यारा
उन्हें याद करती अब भी गंगा की धारा
ले हाथों में शीश चले ऐसे मतवाले
आज़ादी के लिए हालाहल पीने वाले
आज़ादी के रखवालों को हृदय नमन है
जिनके त्याग तपोवन से माटी चंदन है

जिनकी दृढ़ता से उन्नत है आज हिमालय
अब उनके पद चिन्ह हमारे लिए शिवालय
आज तिरंगा जिनकी याद लिए फहराता
वक्त आज भी जिनकी गौरव गाथा गाता
धन्य नींव के पत्थर जिनपर बना भवन है
जिनके त्याग तपोवन से माटी चंदन है

महके बीस गुलाब गंध बाँटे खुशहाली
नव दुल्हन-सी खेतों में नाचें हरियाली
अनुशासन से देश नया जीवन पाता
कर्मशील ही आगे जा पूजा जाता है
आज धरा खुशहाल और उन्मुक्त गगन है
जिनके त्याग तपोवन से माटी चंदन है

 

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