Amir Khusro’s Poetry

Published on January 5, 2018

Amir Khusro’s Poetry

Ab’ul Hasan Yamīn ud-Dīn Khusrau (Ab’ul Hasan Yamīn al-Dīn Khusrow)

Born: 1253 | Patiali, Etah, Uttar Pradesh, India

Died: 1325 (aged 72)

 

Amīr Khusrow (or Khusrau) Dehlawī A Sufi mystic and a spiritual disciple of Nizamuddin Auliya of Delhi, Amīr Khusrow was not only a notable poet but also a prolific and seminal musician. He wrote poetry primarily in Persian, but also in Hindavi. He is regarded as the “father of qawwali” . His father, Amīr Sayf ud-Dīn Mahmūd, was a Turkic officer and a member of the Lachin tribe of Transoxania, themselves belonging to the Kara-Khitais. His mother who belonged to the Rajput tribes of Uttar Pradesh

 

Amir Khusro’s Poetry

 

सेज वो सूनी देख के रोवुँ मैं दिन रैन,

पिया पिया मैं करत हूँ पहरों, पल भर सुख ना चैन।

रैनी चढ़ी रसूल की सो रंग मौला के हाथ।
जिसके कपरे रंग दिए सो धन धन वाके भाग।।

खुसरो बाजी प्रेम की मैं खेलूँ पी के संग।
जीत गयी तो पिया मोरे हारी पी के संग।।

चकवा चकवी दो जने इन मत मारो कोय।
ये मारे करतार के रैन बिछोया होय।।

खुसरो ऐसी पीत कर जैसे हिन्दू जोय।
पूत पराए कारने जल जल कोयला होय।।

खुसरवा दर इश्क बाजी कम जि हिन्दू जन माबाश।
कज़ बराए मुर्दा मा सोज़द जान-ए-खेस रा।।

उज्ज्वल बरन अधीन तन एक चित्त दो ध्यान।
देखत में तो साधु है पर निपट पाप की खान।।

श्याम सेत गोरी लिए जनमत भई अनीत।
एक पल में फिर जात है जोगी काके मीत।।

पंखा होकर मैं डुली, साती तेरा चाव।
मुझ जलती का जनम गयो तेरे लेखन भाव।।

नदी किनारे मैं खड़ी सो पानी झिलमिल होय।
पी गोरी मैं साँवरी अब किस विध मिलना होय।।

साजन ये मत जानियो तोहे बिछड़त मोहे को चैन।
 दिया जलत है रात में और जिया जलत बिन रैन।।

रैन बिना जग दुखी और दुखी चन्द्र बिन रैन।
तुम बिन साजन मैं दुखी और दुखी दरस बिन नैंन।।

अंगना तो परबत भयो, देहरी भई विदेस।
जा बाबुल घर आपने, मैं चली पिया के देस।।

आ साजन मोरे नयनन में, सो पलक ढाप तोहे दूँ।
न मैं देखूँ और न को, न तोहे देखन दूँ।

अपनी छवि बनाई के मैं तो पी के पास गई।
जब छवि देखी पीहू की सो अपनी भूल गई।।

खुसरो पाती प्रेम की बिरला बाँचे कोय।
वेद, क़ुरान, पोथी पढ़े, प्रेम बिना का होय।।

संतों की निंदा करे, रखे पर नारी से हेत।
वे नर ऐसे जाऐंगे, जैसे रणरेही का खेत।।

खुसरो सरीर सराय है क्यों सोवे सुख चैन।
कूच नगारा सांस का, बाजत है दिन रैन।।

 

Man kunto Maula
Fa Ali-un Maula
Dara dil-e dara dil-e dar-e daani
Hum tum tanana nana
Nana nana ray
Yalali yalali yala
Yala yala ray…

 

Zehaal-e-miskeen makun taghaful,
Duraye naina banaye batiyan.

Do not overlook my misery,
by blandishing your eyes and weaving tales,

Ke taab-e-hijran nadaram ay jaan,
Na leho kahe lagaye chatiyan.

My patience has over-brimmed, O sweetheart!
why do you not take me to your bosom.

Shaban-e-hijran daraz chun zulf,
Wa roz-e-waslat cho umer kotah.

Long like curls in the night of separation
short like life on the day of our union.

Sakhi piya ko jo main na dekhun,
To kaise kaTun andheri ratiyan.

My dear, how will I pass the dark dungeon night
without your face before.

Yakayak az dil do chashm-e-jadu,
Basad farebam baburd taskin.

Suddenly, using a thousand tricks
the enchanting eyes robbed me of my tranquil mind.

Kisay pari hai jo ja sunave,
Piyare pi ko hamari batiyan,

Who would care to go and report
this matter to my darling.

Cho shama sozan cho zaraa hairan,
Hamesha giryan be ishq an meh.

Tossed and bewildered, like a flickering candle,
I roam about in the fire of love.

Na nind naina na ang chaina,
Na aap aaven na bhejen patiyan,

Sleepless eyes, restless body,
neither comes she, nor any message.

Bahaq-e-roz-e-visaal-e-dilbar,
Ke daad mara gharib Khusro.

In honour of the day I meet my beloved
who has lured me so long, O Khusro!

Sapet man ke varaye rakhun,
Jo jaye pauN piya ke khatiyan.

I shall keep my heart suppressed
if ever I get a chance to get to her trick.

Sakal Bun

Sakal Bun (Or Saghan Bhun) Phool Rahi Sarson,
Sakal Bun Phool Rahi…..
Umbva Phutay, Tesu Phulay, Koyal Bolay Daar Daar,
Aur Gori Karat Singaar,
Malaniyan Gadhwa Lay Aayin Karson,
Sakal Bun Phool Rahi…..
Tarah Tarah Kay Phool Lagaaye,
Lay Gadhwa Haathan Mein Aaye.
Nijamudin Kay Darwazay Par,
Aawan Keh Gaye Aashaq Rung,
Aur Beet Gaye Barson.
Sakal Bun Phool Rahi Sarson.

Translation-

The Yellow Mustard Is Blooming In Every Field,
Mango Buds Are Clicking Open, Other Flowers Too;
The Koyal Chirps From Branch To Branch,
And The Maiden Tries Her Make-Up,
The Gardener-Girls Have Brought Bouquets.
Colourful Flowers Of All Kinds,
In Hands Everyone’s Bringing;
But Aashiq-Rung (The Lover), Who Had Promised To Come
To Nizamuddin’s House In Spring,
Hasn’t Turned Up – Its Been Years.
The Yellow Mustard Is Blooming In Every Field.

 

Morey Angna Moinuddin Aayo Re

Morey Angna Moinuddin Aayo Re

 

 

Amir Khusro’s Poetry

अपनी छवि बनाई के मैं तो पी के पास गई।
जब छवि देखी पीहू की सो अपनी भूल गई।।

अंगना तो परबत भयो, देहरी भई विदेस।
जा बाबुल घर आपने, मैं चली पिया के देस।।

आ साजन मोरे नयनन में, सो पलक ढाप तोहे दूँ।
न मैं देखूँ और न को, न तोहे देखन दूँ।।

उज्जवल बरन अधीन तन एक चित्त दो ध्यान।
देखत में तो साधु है पर निपट पाप की खान।।

खुसरवा दर इश्क बाजी कम जि हिन्दू जन माबाश।
कज़ बराए मुर्दा मा सोज़द जान-ए-खेस रा।।

खुसरो ऐसी पीत कर जैसे हिन्दू जोय।
पूत पराए कारने जल जल कोयला होय।।

खुसरो दरिया प्रेम का, उल्टी वा की धार।
जो उतरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार।।

खुसरो पाती प्रेम की बिरला बाँचे कोय।
वेद, कुरान, पोथी पढ़े, प्रेम बिना का होय।।

खुसरो बाजी प्रेम की मैं खेलूँ पी के संग।
जीत गयी तो पिया मोरे हारी पी के संग।।

खुसरो मौला के रुठते, पीर के सरने जाय।
कहे खुसरो पीर के रुठते, मौला नहिं होत सहाय।।

खुसरो रैन सुहाग की, जागी पी के संग।
तन मेरो मन पियो को, दोउ भए एक रंग।।

खुसरो सरीर सराय है क्यों सोवे सुख चैन।
कूच नगारा सांस का, बाजत है दिन रैन।।

गोरी सोवे सेज पर, मुख पर डारे केस।
चल खुसरो घर आपने, सांझ भयी चहु देस।।

चकवा चकवी दो जने इन मत मारो कोय।
ये मारे करतार के रैन बिछोया होय।।

नदी किनारे मैं खड़ी सो पानी झिलमिल होय।
पी गोरी मैं साँवरी अब किस विध मिलना होय।।

पहले तिय के हीय में, डगमत प्रेम उमंग।
आगे बाती बरति है, पीछे जरत पतंग।।

पंखा होकर मैं डुली, साती तेरा चाव।
मुझ जलती का जनम गयो तेरे लेखन भाव।।

रैन बिना जग दुखी और दुखी चन्द्र बिन रैन।
तुम बिन साजन मैं दुखी और दुखी दरस बिन नैंन।।

रैनी चढ़ी रसूल की सो रंग मौला के हाथ।
जिसके कपरे रंग दिए सो धन धन वाके भाग।।

संतों की निंदा करे, रखे पर नारी से हेत।
वे नर ऐसे जाऐंगे, जैसे रणरेही का खेत।।

साजन ये मत जानियो तोहे बिछड़त मोहे को चैन।
दिया जलत है रात में और जिया जलत बिन रैन।।

श्याम सेत गोरी लिए जनमत भई अनीत।
एक पल में फिर जात है जोगी काके मीत।।

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