Bewaffa Se Waffa | सच्चा प्यार शायरी04:11

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Published on January 31, 2018

Bewaffa Se Waffa | सच्चा प्यार शायरी

  • दुनिया की भीड़ में तुझे याद कर सकूँ कुछ पल ,
    अजनबी राहों की तरफ कदम मोड़ता हूँ।
  • नशा था उनके प्यार का , जिसमें हम खो गए ,
    उन्हें भी पता नहीं चला कि कब हम उनके हो गए।
  • लिख दूँ तो लफज़ तुम हो ,
    सोच लूँ तो ख्याल तुम हो ,
    माँग लूँ तो मन्नत तुम हो ,
    और चाह लूँ तो मोहब्बत भी तुम ही हो
  • कितने चेहरे हैं इस दुनिया में,
    मगर हमको एक चेहरा ही नज़र आता है,
    दुनिया को हम क्यों देखें,
    उसकी याद में सारा वक़्त गुज़र जाता है।
  • हर शख्स को दिवाना बना देता है इश्क
    जन्नत की सैर करा देता है इश्क
    दिल के मरीज हो तो कर लो महोब्बत
    हर दिल को धड़कना सिखा देता है इश्क !!!
  • एक सुकून सा मिलता है….तुझे सोचने से भी….
    फिर कैसे कह दूँ…मेरा इश्क़ बेवजह सा है….
  • बहुत दिनों बाद तेरी महफ़िल में कदम रखा है ,
    मगर नजरो से सलामी देने का तेरा अंदाज़ नही बदला

दिल की खिड़की से बाहर देखो ना कभी
बारिश की बूँदों सा है एहसास मेरा…

घनी जुल्फों की गिरह खोलो ना कभी
बहती हवाओं सा है एहसास  मेरा….

छूकर देखो कभी तो मालूम होगा तुम्हें
सर्दियों की धूप सा है एहसास मेरा ।

 

जाने क्यूँ आजकल, तुम्हारी कमी अखरती है बहुत
यादों के बन्द कमरे में, ज़िन्दगी सिसकती है बहुत

पनपने नहीं देता कभी, बेदर्द सी उस ख़्वाहिश को
महसूस तुम्हें जो करने की, कोशिश करती है बहुत

दावे करती हैं ज़िन्दगी, जो हर दिन तुझे भुलाने के
किसी न किसी बहाने से, याद तुझे करती है बहुत

आहट से भी चौंक जाए, मुस्कराने से ही कतराए
मालूम नहीं क्यों ज़िन्दगी, जीने से डरती है बहुत।

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