Chah Kar Bhi Uss Ko Bhula Nahi Sakta | Whatsapp Status Video00:27

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Published on February 12, 2018

Chah Kar Bhi Uss Ko Bhula Nahi Sakta | Whatsapp Status Video

वह पूरे चाँद की रात थी

जब तेरे जिस्म की दरिया में डूबकर

मैंने एक बून्द प्रेम

अपने होठों पर रखा था

हव्वा के वर्जित फल की तरह

और चखते ही

दुनिया के लिए एक

संगीन गुनाह हो गयी मैं

क्योंकि मेरे बदन पर

तेरे जिस्म की दरिया का

पानी चढ़ गया था।।

खुदा ने शायद मेरे सर पर

अपना हाथ रखा था

और एक दुआ पढ़ी थी

जो तुम्हारी शक्ल में

इस धरती पर मुझे मिली है

ऊपर से खुदा दुआ बरसाता रहा

नीचे दुनिया मुझपर जलती रही

और तेरे प्रेम के सागर में

मेरी रूह की कश्ती तैरती रही।।

प्यार का झरना

उठते भावों से

भीग रहा है तन मन

कभी मैं ख़ुश होती हूँ

धवल तरंगों से

जैसे कोई गीत सुनाए

जंगल की तन्हाई में

उड़ते पंछी इच्छाओं के

यहाँ वहाँ घूम रहे

इन आशाओं के संग-संग

कभी तो फूटेगा

तुम्हारे ह्रदय का झरना

गिरती बूँदों के संग-संग

बहती जाऊँगी साथ तुम्हारे

जीवन के सागर को

पायेंगे हम दोनों

मुझे प्रतीक्षा है केवल

तुम्हारे प्यार के झरने की

प्यार के झरने की।।

 

प्रेम ह्रदय का स्पंदन है,

प्रेम बिना संसार अधूरा

प्रेम ही जीवन दर्शन है

प्रेम हृदय का स्पंदन है।

प्रेम बिना जीवन मरु है

रूप रस स्पर्श गंध हीन

होता यह जग प्रेम बिन

प्रेम बिना सब भाव शून्य

प्रेम ह्रदय का स्पंदन है।

सुख दुखकी पीड़ा नहोती

सुख की परिभाषा नहोती तेरी मेरी पहचान नहोती

गर जीवन में प्रेम न होता

न होता प्रगति सोपान

ईर्ष्या नकोई द्वेष होता

नक्सल आतंकवाद न होता

प्रेम बिना यह जग न होता

प्रेम तप है

जीवन का

प्रेम ही बल है

सम्बन्धों का

प्रेम सम्बल है जग तीतल का।

प्रेम आचरण है

प्रेम ही जीवन का

सही व्याकरण है।

प्रेम ही जग जीतने का

सुदंर आवरण है।

दिल में

स्थायी बसेरा इसका

यह झांकता

नैनों के कपाटों से ।

तो अधरों में है

ठिकाना इसका।

प्रेम परबस है

प्रेम पर नहीं चलता पहरा

मौन ही इसकी परिभाषा

चंचल नैनों से कहता

अपनी भाषा।

प्रेम ही तो है जिजीविषा ।

प्रेम बरसता जग के

कोने कोने से।

फूलों से, हवाओं से,

ओस की बूंदों से

आचार-विचार और व्यवहार से।

प्रेम बोलता

कोयल की कूक में

चिड़ियों की चहचाहट में

पपीहे की टेर में

चाँद की चांदनी में

प्रेम मिलता

प्रिय के काले खुले केश में

सुरमई आँखों में

सिंदूरी बिंदी में

मेंहदी भरी हथेली में

चूड़ियों की खनक से

प्रेम मिलता है

जिंदगी की राहों में

प्रियतम की बाँहों में।

प्रेम है प्रियतम की

इंतजारी में

व्याकुल मन की बेकरारी में

प्रेम मनुहार में

रूठे प्रियतम की लटों में

प्रेम चादर की सलवटों में

प्रेम धरती में

गगन में

प्रेम है चमन में।

दूध पिलाती माँ में

रंभाती गाय में

जीवन के छोर में

सांसों के अटकी डोर में

प्रेम मन के आंगन में

सावन भादो में

तुलसी के क्यारे में

मेहनत के निवालों में

मदिरा के प्यालों में

प्रेम बसता कवि के ख्यालों में ।

प्रेम से पगा ये तन मन

प्रेम ही है जब जीवन

तो क्यों कोई प्रेम की

अनदेखी कर

करता अप्रेम का आचरण

जबकि प्रेम ही है जीवन का व्याकरण।

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