Hushn Walon Se Nazrein Bachana | Shayari Status for Whatsapp00:27

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Published on February 12, 2018

Hushn Walon Se Nazrein Bachana | Shayari Status for Whatsapp

कुछ जीत लिखू या हार लिखूँ
या दिल का सारा प्यार लिखूँ
कुछ अपनो के जज्बात लिखूँ या सपनो की सौगात लिखूँ
कुछ समझूँ या मैं समझाऊँ या सुन के चलता ही जाऊँ
पतझड़ सावन बरसात लिखूँ या ओस की बूँद की बात लिखूं
मै खिलता सूरज आज लिखूँ या चेहरा चाँद गुलाब लिखूँ
वो डूबते सुरज को देखूँ या उगते फूल की साँस लिखूँ
वो पल मे बीते साल लिखूँ या सादियो लम्बी रात लिखूँ
मै तुमको अपने पास लिखूँ या दूरी का ऐहसास लिखूँ
मै अन्धे के दिन मै झाँकू या आँखों की मै रात लिखूँ
मीरा की पायल को सुन लूँ या गौतम की मुस्कान लिखूँ
बचपन मे बच्चों से खेलूँ या जीवन की ढलती शाम लिखूँ
सागर सा गहरा हो जाऊँ या अम्बर का विस्तार लिखूँ
वो पहली -पाहली प्यास लिखूँ या निश्छल पहला प्यार लिखूँ
सावन कि बारिश मेँ भीगूँ या आन्खो की बरसात लिखूँ
गीता का अर्जुन हो जाऊँ या लंका रावण राम लिखूँ
मै हिन्दू मुस्लिम हो जाऊँ या बेबस इन्सान लिखूँ
मै ऎक ही मजहब को जी लूँ या मजहब की आँखें चार लिखूँ
कुछ जीत लिखूँ या हार लिखूँ या दिल का सारा प्यार लिखूँ

 

वो जब हद से गुजर जाते हैं,
दिल से उतर कर निगाहो मे बस जाते है,
मुस्कुराओ तो होंटो पर भी वो ही नज़र आते है।
ना जाने किस राह पे जाता हूँ,
हर वक्त उनको ही साथ पाता हूँ।
वो मुझे हर जगह नज़र आते हैं,
फिर कैसे कह दूँ वो मेरा दिल दुखाते है
अब तो मुझे हर पल उन्ही की याद आती है,
इस से ज्यादा क्या कहूँ वो ही मेरे सच्चे साथी है।
पर मैं ही नादाँ था उन्हे ना पहचान सका,
खुली आँखो से दुनिया को ना जान सका।
कुछ पल के लिए जो मुस्कुरा लिया,
ऐसा लगा उन्से दामन छुडा लिया,
पर उन्से जुदाई मुझे रास ना आई,
हर कदम पर मैने ठोकर ही खीई।
वो जो कभी मेरे दिल से निगाहो मे आए,
और होंटो पर भी नजर आये,
वो और कोई नही, वो है मेरे दर्द के साये।
अब इससे ज्यादा और कुछ नही कहना चाहता हूँ,
बस अपने सच्चे दोस्त के साथ ही रहना चाहता हूँ।
इसी के साथ अपनी कलम को विराम देता हूँ,
और उन्ही को दिल मे विश्राम देता हूँ।

 

वक़्त मुझे इतना भी मजबूर ना करे,
कम से कम यादो से तेरी दूर ना करे.
शोहरते बदल देती है रिश्तो के मायने,
मुकद्दर मुझे इतना भी मशहूर ना करे.
कम से कम यादो से तेरी दूर ना करे.
दौलत ,तरक्की या फिर कामयाबीया मेरी ,
ये वक़्त की ऊंचाईया मगरूर ना करे.
कम से कम यादो से तेरी दूर ना करे.
जुदाई भी दी है उन्होने तौफे में ‘शफक’ ,
कैसे भला कोई इसे मंजूर ना करे.
कम से कम यादो से तेरी दूर ना करे.

 

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