Kabhi Kisiko Muqammal Jahan Nahi Milta | Shayari Status in Hindi00:30

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Published on February 12, 2018

Kabhi Kisiko Muqammal Jahan Nahi Milta | Shayari Status in Hindi

अन्तिम सांसे जब ले -लेकर
मई याद कर रहा था हर पल ,
अच्छा या बुरा किया मैंने
वो सब हिसाब कर रहा था हल .
तब एक लम्हा मुझसे बोला ,
सब लेकर बाडों का चोला .
तुम आज नहीं मृत पहले थे ,
सब सच ,तुम झूठ अकेले थे .
सद् सत्य का नाश किया तुमने
तुम झूठ पाप के ठेले थे .
सत् जीवन व्यर्थ किया तुमने
हाँ कुत्सित अहम् के फूले थे .
उस पल की व्यथा का मई मारा ,
जीवन तृन -मूल लगा सारा .
सब देस धाम अब छूट गया
हाँ ! सब जीत गए बस मैं हारा .
……सब जीत गए बस मैं हारा .
………सब जीत गए बस मैं हारा

 

पत्थरों के बीच से बहती हुई एक नदी बन कर
तुम उतर गयी हो मेरे सीने में
एक तड़प की तरह
और मैं एक नाव बन कर
नदी के तट से जा लगा हूँ

एक लम्बी तपती दोपहरी
ठंडे जल का एक कुआं बन गई है
रात की झोली में एक सितारा गिर कर
चुम्बन बन गया है

मेरी आँखों से
एक जगमगाता शिकारा निकल कर
तैरने लगा है
उस प्यारे से समुद्र में
जो तुम ने रच डाला है
मेरी ज़िंदगी के सूने कैनवास पर

 

वह पौधा सुख गया ,जैसे वह रिश्ता टूट गया
मैं उसे सुबह हल्की धुप मे रखती
दोपहर की कड़ी धुप से उसे बचाती,
फ़िर भी वह पौधा मर गया

मैं उसे ह्रदय मे स्थान देती
मैं उसे नाम और पहचान देती,
फ़िर भी वह रिश्ता टूट गया

मैंने उस पौधे को खाद पानी दिया
जैसे मैंने उस रिश्ते को पहचान दी
उस पौधे की बढ़ती पत्तियो को मैं रोज गिनती
जैसे उस रिश्ते के नये आयामों को मैं रोज देखती
फ़िर भी वह रिश्ता टूट गया
जैसे वह पौधा मर गया

मैंने इंतिज़ार किया इस पौधे मे फूल लगेंगे
जो इसकी काँटों वाली छवि को ढंक देंगे
जैसे मैंने इंतिज़ार किया इस रिश्ते की नई परिभाषा बनेगी
जो इसके सारे बुरे पहलुओं से परे होगी
फ़िर भी वह रिश्ता टूट गया
जैसे वह पौधा मर गया

मैंने उस पौधे मे भी अपनी छवि देखि, उस रिश्ते मे भी ख़ुद को देखना चाहा
मैं सोंचती हूँ शायद इसी अति अनुराग को कारण वह रिश्ता टुटा
जैसे बहुत सींचने के कारण जलजमाव से वह पौधा मर गया.

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