Kaho Naa Pyaar Hai | Shayari Status for Whatsapp00:25

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Published on February 12, 2018

Kaho Naa Pyaar Hai | Shayari Status for Whatsapp

शब्द छूटे भाव की
अनुरागिनी मैं हो गई।
देह छूती श्वास की अनुगामिनी
मैं हो गई ।
क्या भला बाहर मैं खोजूँ ?
क्यूँ भला और किस से रीझूँ ?
आत्मरस का स्वाद पा,
आत्मसलिल में हो निमग्न
आत्मपद की चाह में,
उन्मादिनी में हो गई ।
मैं तो अंतर्लापिका हूँ
कोई बूझेगा मुझे क्या ?
जो हुए हैं ‘स्वस्थ स्वतः
उन महिम सुधि आत्मज्ञों के
प्रेम के रसपान की अधिकारिणी
मैं हो गई,
शब्द छूटे भाव की
अनुरागिनी मैं हो गई
देह छूती श्वास की अनुगामिनी
मैं हो गई !

 

अनुराग में प्रेम है त्याग में प्रेम है,
भाग्य में प्रेम है ये ही तो नेम है।
ग्यान ही प्रेम है ध्यान ही प्रेम है,
राम ही प्रेम है प्रेम ही प्रेम है।
शिवदीन है प्रेम कहो मन में,
जन में तन में कुशलानंद क्षेम है।
परवाह करो न डरो न मरो,
मन प्रेम करो शुभ टेम ही टेम है |

 

एक अरसा बीत गया
अब वह नहीं आती
उसकी याद आती है

तब वह आती थी
ख़ूबसूरत, नन्हे खरगोश की तरह
हड़बड़ाती हुई
प्रेम में बेचैन, तड़फड़ाती हुई

वह आती थी
अधसोई-सी, अधजागी-सी
थकी हुई-सी, भागी-सी
लापरवाह अपने चारों ओर से
ढूँढ रही हो ज्यों मुझे भोर से

प्रेम में मेरे डूबी थी ऐसे
समुद्र-सी उन्मत्त, पागल हो जैसे
आते ही मुझसे यूँ लिपट जाती थी
उमंग से मेरी फटने लगती छाती थी

कभी वह आती थी उदास, कँपकँपाती हुई
ख़ामोश रहती थी, बात नहीं करती थी
कभी घर-भर में या बाहर कभी लान में
चक्कर काटती रहती थी मौन
मेरे मन को अपनी उदासी से दहलाती हुई

कभी वह घंटियों की तरह घनघनाती आती थी
बच्चों की तरह मुझे दुलराती थी
मेरे बालों में उँगलियाँ फिराती थी
मेरे माथे पर, नाक पर, गालों पर, होठों पर
अपने ऊष्म, गर्म चुम्बन चिपकाती थी
मेरी मूँछों को, पलकों को, भौहों को, कानों को
नन्ही, गोरी, पतली उँगलियों से सहलाती थी
बारिश की रिमझिम-सा स्नेह बरसाती थी

वह आती थी
अब नहीं आती
उसकी याद आती है

 

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