Tum Bin Na Hum Jee Sakenge | Shayari Dosti Love Sad03:26

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Published on January 12, 2018

Title:

Tum Bin Na Hum Jee Sakenge | Shayari Dosti Love Sad

Lyrics:

उसे इत्तला कर देना कि
उसके जाने के बाद भी मैं जिंदा हूँ
पिंजरे में कौन कैद करेगा मुझे
मैं तो सांसों की जंजीरों में बंधा परिंदा हूँ।

तड़पा दे मुझे इतना की हद हों जाए
नफरत तुझसे मुझको बेहद हो जाए,
सोचने पर भी न आये मुझे ख्याल तेरा
तेरी यादों और मेरी जिंदगी में एक सरहद हो जाए।

न दुआ असर करती है
न दवा असर करती है
न जाने कैसी गर्दिश है वक़्त की
अब तो ग़मों की दुनिया
मेरी खुशियों में बसर करती है।

वक़्त भर देता है हर जख्म
या जख्मों के साथ रहना आ जाता है
नासूर से होती हैं ये यादें भी
जिंदगी में तब भी आती हैं
जब सब सहना आ जाता है।

Tum Bin Na Hum Jee Sakenge | Shayari Dosti Love Sad

मैं खामोश हूँ मेरी कलम बोल रही है
लोगों के नजरिये को अनुभवों से तोल रही है,
मर चुकी है इंसानियत आज के इंसानों में
सच्चाई भी आज अपना ज़मीर टटोल रही है।

वो इस जहाँ का खुदा है, मुगालता है उसे
हैं सब बुरे वो भला है, मुगालता है उसे

उछालता है वो कीचड़ लिबास पर सबके
और खुद दूध धुला है, मुगालता है उसे

नजर के सामने इक चीज जो चमकती है
फलक पे चाँद खिला है, मुगालता है उसे

गई है कान में सरगोशियाँ सी करके हवा
कुछ उससे मैंने कहा है, मुगालता है उसे

Tum Bin Na Hum Jee Sakenge | Shayari Dosti Love Sad

चमकती रेत में डाली जरूर है उँगली
पर उसका नाम लिखा है, मुगालता है उसे

है कुछ मुक्तक कुछ में जलता बुझता हुआ
किसी सूरज का सगा है, मुगालता है उसे

आज जो आपको सुनानी है
ज़िन्दगी की अजब कहानी है

तब मिले हैं ग़ज़ल के ये मोती
हमने दुनिया की ख़ाक छानी है

घर के बाहर निकल के देखो तो
आज की रुत बहुत सुहानी है

सौंधी ख़ुशबू से भर गया घर को
पहली बारिश का पहला पानी है

मेरी ग़ज़लों में दर्दे मुफ़लिस है
कोई राजा, न कोई रानी है

फिर से महकेगा आज घर मेरा
आज फिर याद उनकी आनी है

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