Udki Yaadon Ke Jo Aakhri Thhe Nishan | Shayari Dosti Love Sad03:28

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Published on January 12, 2018

Title:

Udki Yaadon Ke Jo Aakhri Thhe Nishan | Shayari Dosti Love Sad

Lyrics:

Shayari Dosti Love Sad

इस नतीजे में पहुँचने पर बड़ी देर लगी मुझे.. तुझसे अच्छे तो बहुत हैं.. पर कोई तुझसा नहीं..

क्यूँ हर बात में कोसते हो तुम लोग नसीब को, क्या नसीब ने कहा था की मोहब्बत कर लो !

अब छोड़ दिया है “इश्क़” का “स्कूल” हमने भी हमसे अब “मोहब्बत” की “फीस” अदा नही होती !

ज़रा मुस्कुराना भी सीखा दे ऐ ज़िंदगी रोना तो पैदा होते ही सीख लिया था

आहिस्ता चल ए जिंदगी कुछ कर्ज चुकाने बाकी है, कुछ दर्द मिटाने बाकी है, कुछ फर्ज निभाने बाकी है..!!

शिकवे तो सभी को है जिंदगी से .. पर जो मौज में जीना जानते है, वो शिकायत नहीं करते..!!!

Udki Yaadon Ke Jo Aakhri Thhe Nishan | Shayari Dosti Love Sad

घुट-घुट कर जीना छोड़ दे, तू रुख हवाओं का मोड़ दे,
हिम्मत की अपनी कलम उठा, लोगों के भरम को तोड़ दे,
तू छोड़ ये आंसू उठ हो खड़ा, मंजिल की ओर अब कदम बढ़ा,
हासिल कर इक मुकाम नया, पन्ना इतिहास में जोड़ दे,
घुट-घुट कर जीना छोड़ दे, तू रुख हवाओं का मोड़ दे,
हिम्मत की अपनी कलम उठा, लोगों के भरम को तोड़ दे।

Udki Yaadon Ke Jo Aakhri Thhe Nishan | Shayari Dosti Love Sad

उठना है तुझे नहीं गिरना है, जो गिरा तो फिर से उठना है,
अब रुकना नहीं इक पल तुझको, बस हर पल आगे बढ़ना है,
राहों में मिलेंगे तूफ़ान कई, मुश्किलों के होंगे वार कई,
इन सबसे तुझे न डरना है, तू लक्ष्य पे अपने जोर दे,
घुट-घुट कर जीना छोड़ दे, तू रुख हवाओं का मोड़ दे,
हिम्मत की अपनी कलम उठा, लोगों के भरम को तोड़ दे।

चल रास्ते तू अपने बना, छू लेना अब तू आसमान,
धरती पर तू रखना कदम, बनाना है अपना ये जहाँ,
किसी के रोके न रुक जाना तू, लकीरें किस्मत की खुद बनाना तू,
कर मंजिल अपनी तू फतह, कामयाबी के निशान छोड़ दे,
घुट-घुट कर जीना छोड़ दे, तू रुख हवाओं का मोड़ दे,
हिम्मत की अपनी कलम उठा, लोगों के भरम को तोड़ दे।

Udki Yaadon Ke Jo Aakhri Thhe Nishan | Shayari Dosti Love Sad

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